Public awareness programme on Control of Panama-wilt in Banana

केले में पनामा-विल्ट के नियंत्रण पर जन जागरूकता कार्यक्रम

भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के लखनऊ स्थित क्षेत्रिय अनुसंधान केंद्र ने नरेंद्र देव कृषि एवं प्राद्यौगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के सहयोग से, विश्वविद्यालय में दिनांक 24.01.2019 को केले में फ्यूसैरियम कवक के संक्रमण के कारण पनामा-विल्ट बीमारी से सम्बंधित एक दिवसीय जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे उत्तर प्रदेश के लगभग 42 कृषि विज्ञान केंद्रों के हितधारक, राज्य बागवानी विभाग के प्रतिनिधि और विश्वविद्यालय के प्राध्यापको एवं वैज्ञानिकगण सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन नरेंद्र देव कृषि एवं प्राद्यौगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संधू ने किया जबकि डॉ. राव ने उपरोक्त कार्यक्रम का संचालन किया।

इस अवसर पर, डॉ. एस राजन, निदेशक भा.कृ.अनु.प.- कें.उ.बा.सं. ने प्रतिभागियों को केले में (विशेषकर जी-9 किस्म में) पनामा-विल्ट नामक घातक एपिडेमिक बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए संस्थान द्वारा शुरू किए गए सहयोगी दृष्टिकोण के विषय में जानकारी दी। उन्होने बताया कि, भा.कृ.अनु.प.- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के लखनऊ स्थित क्षेत्रिय अनुसंधान केंद्र और उत्तर प्रदेश केला उत्पादक संघ के साथ मिलकर एक योजना के तहत काम किया है। इस दिशा में काम करते हुए वैज्ञानिको के दल ने कवक और जीवाणु का एक नया अद्वितीय जैव-सूत्रीकरण बनाया और किसानो के अनुप्रयोग हेतु अनुकूल विधि भी विकसित की। इस नए जैव-सूत्रीकरण का 48 एकड़ से अधिक पनामा-विल्ट प्रभावित क्षेत्रो में सफल परीक्षण किया गया और लगभग 95% बीमारी को नियंत्रित किया गया। इस सफल प्रौद्योगिकी के प्रसार एवं राज्य में रोग के नियंत्रण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सम्मिलित संस्थानों और उत्तर प्रदेश केला उत्पादक संघ के साथ एक समझौता ज्ञापन शुरू किया गया है। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. टी दामोदरन ने प्रतिभागियों को इस बीमारी के लक्षण और उसकी पहचान के बारे में जानकारी दी।

व्याख्यान उपरान्त सभी प्रतिभागियों को पनामा-विल्ट प्रभावित अयोध्या जिले के सोहावल ब्लॉक के कटारौली और मंगलसी गांव का भ्रमण भी कराया गया। प्रतिभागियों को उन किसानो से भी संपर्क कराया गया जो संस्थान के योजना के तहत पनामा-विल्ट को नियंत्रित कर लाभान्वित हुए है।

One-day public awareness programme on "Control of Panama wilt in Banana" was organized by ICAR- Central Institute of Subtropical Horticulture, Lucknow and Regional Research Station- Central Soil Salinity Research Institute on 24.01.2019 at Narendra Dev University of Agricultural and Technology, Ayodhya. Stakeholders from 42 krishi vigyan kendra (KVK) of Uttar Pradesh, representatives from the State Horticulture Department, scientists and professors of the university participated in the programme. The programme was inaugurated by Dr. Sandu, Vice-Chancellor, NDUA&T while Dr. Rao conducted the aforesaid programme.

On this occasion, Dr. S. Rajan, Director, ICAR-CISH gave information about participatory approach initiated by ICAR-CISH and RRS-CSSRI, Lucknow with collaborative effort of Banana Production Association, Lucknow to control the spread of fatal epidemic panama wilt disease (especially in the G-9 variety) which is caused by Fusarium species. While working in this direction, the team of scientists formulate a unique combination of fungus and bacteria and also developed the process for suitable farmers application. This new bio-formulation was successfully tested in more than 48 acres of Panama-affected areas and approximately 95% of the disease was controlled. In order to actively participate in the spread of this successful technology and control of disease in the state, a Memorandum of Understanding has been initiated with the institutes and Uttar Pradesh Banana Association. Dr. T. Damodaran, Principal scientist, RRS-CSSRI, gave knowledge about panama wilt symptoms and their identification.

After the lectures, all participants visited the panama-wilt affected Katarauli and Mangalasi villages of Sohawal block of Ayodhya. Participants were also interacted with farmers who have been benefited with scheme of the institute for mitigating the panama-wilt.